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Saturday, November 30, 2019

धरती से सबसे दूर आकाशीय पिंड - अरोकोथ (Arrokoth)



अल्टिमा थुले या आराकोथ 
अमेरिकी अन्तरिक्ष संस्थान का न्यू होराइजन्स (New Horizons) अपने नाम को चरितार्थ करता हुआ नए क्षितिज का निर्माण कर रहा है. 2006 में प्लूटो के अध्ययन के लिए छोड़े गये अन्तरिक्ष यान ने इस वर्ष के प्रारंभ में हमसे सबसे दूर स्थित आकाशीय पिंड की खोज की थी. उस समय इसे अल्टिमा थुले (Ultima Thule) का नाम दिया गया था. यह बर्फीला पिंड अल्टिमा थुले प्लूटो से भी करीब एक बिलियन मील (1.6 बिलियन किलोमीटर) मील दूर है. 16 किमी लम्बे और 32 किमी चौड़ाई वाले इस पिंड के बारे में नासा के प्रबंधक जिम ब्रिडेंस्टाइन का मानना है कि अल्टिमा थुले में उन अंशों को पाया गया है, जिससे सौर मंडल का निर्माण हुआ है.

हाल में हमसे लगभग 6 बिलियन मील दूर खोजे गए पिंड को अरोकोथ (Arrokoth) का आधिकारिक नाम दिया गया है. देसी अमेरिकी भाषा में इसका मतलब आकाश होता है. इस सम्बन्ध में साउथवेस्ट रिचर्स इंस्टीट्यूट के मुख्य वैज्ञानिक एलन स्टर्न के अनुसार, 'अरोकोथ नाम आसमान (यानी ऊंचाई) की ओर देखने को प्रेरित करता है. साथ ही ये शब्द तारों की दुनिया के बारे में और जानने की उत्सुकता को दर्शाने वाला भी है. यह सौर मंडल के सबसे बाहरी क्षेत्र के कुइपर बेल्ट में स्थित है.'

Thursday, July 9, 2015

सबसे तेज अन्तरिक्ष यान प्लूटो के बेहद पास (New Horizons Spacecraft near Pluto)

अन्तरिक्ष विज्ञान के इतिहास में अब तक का सबसे तेज अंतरिक्षयान अपनी यात्रा में 14 जुलाई को प्लूटो के बेहद नजदीक पहुच चूका होगा तब हमें इस क्षुद्र ग्रह की बेहद शानदार तस्वीरों के साथ अनेक रहस्य खोलने वाली जानकारियाँ भी प्राप्त होंगी. 

अमेरिकी अन्तरिक्ष केंद्र नासा का 2006 में अपनी यात्रा पर रवाना हुआ न्यू होराइजन्स (New Horizons) अन्तरिक्ष यान अब तक का सबसे तेज अन्तरिक्ष यान है जो प्लूटोनियम की शक्ति से प्रति दिन लगभग 10 लाख मील का सफ़र तय कर रहा है. सौर मंडल की अपनी यात्रा में अभी यह प्लूटो और उसके पांच उपग्रहों का अध्ययन कर रहा है. इसी कड़ी में 7 जुलाई 2015 को इसने प्लूटो की बेहद शानदार तसवीर भेजी है जब वह प्लूटो से लगभग पचास लाख मील दूर था. इस चित्र में एक बड़ा भाग चमकीला नजर आ रहा है जो दिल के सामान लग रहा है. वैज्ञानिकों ने इस भाग का क्षेत्रफल लगभग 1200 मील अनुमानित किया है. इसी के बगल में एक गहरा भाग भी नजर आ रहा है जो कि ‘द व्हेल’ के नाम से पुकारा जाता है. 

वैसे यह अन्तरिक्ष यान जब प्लूटो से अपनी निकटतम दूरी पर होगा तब वैज्ञानिकों को इससे 500 गुने ज्यादा बेहतर तस्वीरों की आशा है. तब यह अन्तरिक्ष यान प्लूटो की सतह से केवल 7800 मील दूर होगा. अभी सौ साल भी नहीं हुए जब हम चाँद तक जाने का सोच भी नहीं सकते है और आज हम सौर मंडल के इस दूरस्थ सदस्य के इतने नजदीक पहुच चुके हैं. विज्ञान और मानव की असीमित सम्भावंनाओं का यह एक बेहतरीन उदाहरण है. इतने पास से यह अन्तरिक्ष यान कितने रहस्यों से पर्दा उठता है और कितनी जानकारियाँ प्रदान करता है, यह जल्द ही पता चल जाएगा, वैसे वैज्ञानिक मुख्य रूप से इसके वातावरण का अध्ययन करना चाहते हैं जिसमे हमारे ग्रह की तरह नाइट्रोजन की बहुलता है. 

Wednesday, April 15, 2015

न्यू होराइजन्स स्पेसक्राफ्ट - प्लूटो की ओर

न्यू होराइजन्स स्पेसक्राफ्ट
नासा (NASA) ने हाल ही में न्यू होराइजन्स स्पेसक्राफ्ट (New Horizons Spacecraft) से प्लूटो की खिंची गयी पहली रंगीन तस्वीर जारी की है. ऊपर के चित्र को देखने पर कुछ ख़ास नहीं नजर आता है परन्तु नासा के अनुसार ये इस साल के सबसे महत्वपूर्ण अन्तरिक्ष अन्वेषणों में से एक की झलक है. चित्र में प्लूटो केवल दो छोटे बिन्दुओं के रूप में नजर आ रहा है.  

न्यू होराइजन्स स्पेसक्राफ्ट इस वर्ष जुलाई में इस क्षुद्र ग्रह (अब प्लूटो मुख्य ग्रहों में शामिल नहीं है) के पास से गुजरेगा. इस चित्र में प्लूटो केवल दो छोटे बिन्दुओं के रूप में नजर आ रहा है और नासा इसे ही लक्षित करेगा. जब यह वाकई में प्लूटो के पास पहुचेगा तो ऐसा पहली बार होगा कि हमें इस क्षुद्र ग्रह की इतने करीब से ली गयी तसवीरें नजर आएँगी क्योंकि अब तक इस क्षुद्र ग्रह के बारे में जो भी जानकारियाँ हैं वो केवल दूरस्थ निरीक्षणों के आधार पर प्राप्त हुए हैं. यह अन्तरिक्ष यान इस ग्रह के बारे में और अधिक जानकारियाँ जुटाने का प्रयास भी करेगा. नासा के वैज्ञानिक इस मुलाक़ात के लिए रोमांचित हैं क्योंकि उन्हें विश्वास है कि यह अन्वेषण आश्चर्यजनक नवीन खोजों से सबको रोमांचित करेगा. प्लूटो के साथ यह इसके अब तक ज्ञात पाँच चंद्रमाओं के बारे में भी अध्ययन करेगा और बहुत संभव है कि हमें इसके और चंद्रमाओं का पता चल सके. इस कार्य हेतु इसमें कुल सात वैज्ञानिक उपकरण लगाए गए हैं. 

इस सुदूर क्षुद्र ग्रह के पश्चात् न्यू होराइजन्स सौर मंडल में और आगे बढकर नए क्षुद्र ग्रहों और प्लूटो के चारों ओर स्थित चट्टानों का भी अध्ययन जारी रखेगा.