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Sunday, December 23, 2018

इसरो की महत्वाकांक्षी संचार योजना 2019 - मानव अभियान के पूर्व

ISRO उपग्रह प्रणालियाँ 
विगत वर्षों में भारत ने अन्तरिक्ष के क्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता प्राप्त करते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी क्षमता की ओर आकर्षित किया है. भविष्य के लिए भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो (ISRO) की अनगिनत योजनायें हैं जिनमें से मानव को अन्तरिक्ष में भेजना सर्वाधिक महत्वाकांक्षी है, लेकिन इस योजना के पहले इसरो अपनी तैयारी पूर्ण रखना चाहता है.   

इसरो के चेयरमैन श्री के. सिवन प्रस्तावित मानव अभियान के पूर्व अन्तरिक्ष में उपग्रहों का एक अत्याधुनिक संचार हब (Satellite Communication Hub) स्थापित करने के प्रति संकल्पित हैं. उन्होंने बताया कि इसरो रिमोट सेंसिंग और पृथ्वी पर निगाह रख रहे उपग्रहों से डाटा के सुचारू आदान-प्रदान और संचार के लिए इंडियन डाटा रिले सैटेलाइट सिस्टम – ईडीआरएसएस (Indian Data Relay Satellite System-IDRSS) स्थापित करेगा।

इसके अंतर्गत दो आधुनिक उपग्रह भेजे जायेंगे जिनमें से पहला सैटेलाइट 2019 में लॉन्च होने की उम्मीद है। आईडीआरएसएस के दोनों उपग्रह जियोस्टेशनरी ऑर्बिट (Geostationary Orbit) में स्थापित होंगे.  यह धरती के चारों ओर स्थित वह दीर्घवृत्ताकार कक्षा है जिसमें घूमने वाले पिण्ड (जैसे,कृत्रिम उपग्रह) का आवर्तकाल पृथ्वी के घूर्णन काल के बराबर यानि 23 घण्टा, 56 मिनट 4 सेकेण्ड का होता है। यानि उपग्रह हमेशा धरती के सापेक्ष एक ही स्थान पर रहेगा. यहां से ये दोनों उपग्रह विभिन्न रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट व निचली कक्षाओं में चक्कर लगा रहे सैटेलाइट से संपर्क बनाने में मदद करेंगे।

आईडीआरएसएस विभिन्न सैटेलाइट से मिली जानकारियों को धरती पर स्थित केंद्रों तक भेजेगा। इससे डाटा के आदान-प्रदान की गति तेज होगी। आईडीआरएसएस लॉन्चिंग के समय से ही मानव ले जाने वाले रॉकेट पर नजर रखने में सक्षम होगा और pप्रत्येक पल की जानकारी तेज रफ़्तार से धरती पर नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध होती रहेगी. मानव अभियान बेहद संवेदनशील अभियान है इसलिए बिना ऐसे सुदृढ़ व्यवस्था के मानव अभियान पर बात करना उचित नहीं होगा. इस आईडीआरएसएस प्रणाली के स्थापित होने के बाद इसरो का अपने यानों और उपग्रहों से संपर्क के लिए अन्य देशों पर निर्भरता भी कम होगी। वर्तमान में अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप के पास पहले से ही ऐसी प्रणाली मौजूद है, और सब ठीक रहा तो हम इस क्षेत्र के नवीनतम सफल प्रतिभागी होंगे. 

इसरो की कामयाबी की आशाओं के साथ .....भारत माता की जय 

Tuesday, May 8, 2018

इसरो की कहानी (ISRO Ki Kahani) e-Book

आज बड़े दिनों के बाद अन्तरिक्ष विज्ञान पर हिंदी में एक अच्छी पुस्तक मिली तो आप सभी के साथ शेयर करने से खुद को रोक नहीं सका. 



यह पुस्तक भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान केंद्र यानि इसरो (ISRO) के जन्म से लेकर उसके विकास की कहानी रंगीन चित्रों और पृष्ठों में कहती है. आशा है आप सभी को पसंद आएगी ...



Sunday, December 28, 2014

गगन (GAGAN - GPS Aided GEO Augmented Navigation)

GAGAN का पूरा नाम है - GPS Aided GEO Augmented Navigation या जीपीएस आधारित जियो(धरातलीय) आवर्धित पथ प्रदर्शन प्रणाली.  इसरो द्वारा विकसित गगन का उद्देश्य नागरिक विमानन प्रयोजन के लिए उपग्रह की सहायता से संचालित सटीक पथ प्रदर्शन सेवा प्रदान करना है जो कि इस सकुशल उड़ान हेतु अत्यावश्यक है, साथ ही भारतीय आकाश में बेहतर वायु यातायात प्रबंधन करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है ताकि होने वाली दुर्घटनाओं को कमतर किया जा सके.

इस प्रणाली को भारतीय उड्डयन प्राधिकरण के साथ मिलकर लागू किया है. यह पद्धिति धरातल पर स्थित केन्द्रों की एक प्रणाली का उपयोग जीपीएस मानक स्थिति निर्धारक सेवा हेतु आवश्यक संकेतो को आवर्धित करना है ताकि संकेत प्रबल बने रह सकें.

वृहद् अध्ययन और शोध के पश्चात् धरातल पर अनेक केन्द्रों का एक जाल तैयार किया गया है जो जीपीएस उपग्रह के संकेतो को एकत्रित तथा आवर्धित कर सके. इस जानकारी के माध्यम से मुख्य नियंत्रण केंद्र किसी प्रकार की सांकेतिक गड़बड़ी को सुधारने हेतु सूचना जारी करता है. इस सूचना को विमान में समान जीपीएस आवृत्ति पर कार्यरत रिसीवर तक पहुचाया जाता है ताकि विमान चालाक तक अन्य विमानों/यातायात  तथा दिशाओं की सहीं जानकारी पहुच सके.

Thursday, November 7, 2013

मंगलयान - कक्षीय दूरी बढाने की पहली प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण

भारत देश के पहले अंतरग्रहीय मिशन के तहत मंगलवार को श्रीहरिकोटा से मंगल ग्रह के लिए सफल रूप से प्रक्षेपित मंगल यान करीब 25 दिनों तक पृथ्वी की कक्षा की परिक्रमा करेगा, लेकिन इस दौरान यह एक बार भी भारत के ऊपर से नहीं गुजरेगा.

मंगल यान से जुड़ी नवीन जानकारी के अनुसार मंगल यान को पृथ्वी की कक्षा से निकालकर मंगल की कक्षा में स्थापित करने की दिशा में पहली प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार रात 1:17 बजे कक्षीय दूरी बढाने की पहली प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है. कक्षीय दूरी बढाने की यह प्रक्रिया पीनिया स्थित इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (इसट्रैक) से पूरी की गई. कक्षीय दूरी बढाए जाने के बाद अब मंगल यान की पृथ्वी से अधिकतम दूरी (एपोगी) बढ़कर 28825 किलोमीटर और न्यूनतम दूरी (पेरिगी) 252 किलोमीटर हो गयी है. इस प्रक्रिया में 440 न्यूटन तरल इंधन जलाया गया और पूरी प्रक्रिया 416 सेकंड में पूरी हुयी. इसरो के अधिकारियों के अनुसार मंगल की ओर प्रस्थान करने से पहले पांच बार और इसकी कक्षीय दूरी बढ़ाई जानी है.

अंतिम कक्षीय परिवर्तन के बाद तब मंगल यान की पृथ्वी से एपोगी २ लाख किलोमीटर हो जायेगी, जिसके बाद 1 दिसम्बर को उसे लाल ग्रह की और रवाना कर दिया जाएगा. अपनी 300 दिनों की यात्रा में लगभग 40 करोड़ किलोमीटर का सफ़र तय करके यह यान लाल ग्रह पर पहुचेगा, जहां इसे मंगल की कक्षा में स्थापित किया जाएगा. यही सबसे ज्यादा जोखिम भरा भाग है क्योंकि अगर सब ठीक न रहा तो मंगल का गुरुत्वाकर्षण इस खींचकर अपने में समा लेगा.