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Sunday, May 27, 2018

बीस अरब सूर्य इतना बड़ा ब्लैक होल!!!

चित्रकार की कल्पना में ब्रम्हांड में स्थित ब्लैक-होल

ब्लैक होल या कृष्ण-विविर, अन्तरिक्ष के सबसे अबूझ पहेलियों में से एक हैं. हमें ये तो पता है कि ये वो पिंड हैं जिनका घनत्व बहुत अधिक होता है और अपने अति-शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण के कारण ये अपने आस-पास की समस्त चीजों को हमेशा के लिए अपने अन्दर समा लेते हैं. प्रकाश तक एक बार यही इसके अन्दर चला जाए तो वापस नहीं आ सकता है. इसी खतरनाक और रहस्यमय ब्लैक होल की खोज की कड़ी में एक नया और अद्भुत अध्याय जुड़ा है. 

आस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के खगोल वैज्ञानिकों के यूरोपियन स्पेस एजेंसी के आंकड़ों की अध्ययन से किये गए नवीन  खोज पर यकीन किया जाए तो उन्होंने एक ऐसे ब्लैक होल का पता लगाया है जिसका आकार हमारे सूर्य से कम-से-कम २० अरब ज्यादा बड़ा है यानि इसके अन्दर हमारे सूर्य जैसे २० अरब तारे समाहित हो सकते हैं. रोजाना तेज रफ़्तार से बढ़ता यह ब्लैक होल हर दुसरे दिन हमारे सूर्य जितने बड़े खगोलीय पिंड को निगल रहा है और अपना वजूद बढ़ाते चला जा रहा है. अनुमान के अनुसार यह प्रत्येक दस वर्ष में 1% की दर से बढ़ रहा है. 

 
आकाशगंगा के पिंडों को निगलता ब्लैक होल
इतनी अधिक मात्रा में खगोलीय पिंडों को निगलते वक़्त घर्षण और तेज रफ़्तार के कारण उत्पन्न गर्मी से इतनी अधिक मात्रा में प्रकाश उत्पन्न हो रहा है इसके एक्रियेसन बेल्ट में कि यह हमारी सम्पूर्ण आकाशगंगा की तुलना में हजारों गुना अधिक उज्जवल है. यदि यह हमारी आकाशगंगा में आ जाए तो चाँद से कई गुणा ज्यादा चमकदार होगा और इसके प्रकाश में कोई भी तारा दिखाई नहीं देगा.

हालांकि खगोल वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि इस तरह के ब्लैक होल असामान्य हैं और बेहद संख्या में बेहद नगण्य हैं. इतने विशालतम आकार को देखते हुए उनका यकीन है कि ये ब्रम्हांड के शुरुआत से ही विद्यमान होंगे. अभी यह नया ब्लैक होल पृथ्वी से काफी दूर है परन्तु यदि यह आकाशगंगा में भी आ गया तो भी यह कई सारे तारों को निगलने में इसे कुछ ही समय लगेगा. साथ ही इससे प्रचुर मात्रा में निकलने वाली पराबैंगनी किरणें तथा एक्स-रे से पृथ्वी का जीवन भी संकट में आ जाएगा. 

अभी अध्ययन अपने शुरूआती स्तर पर है पर वैज्ञानिक बेहद बेचैनी से इसके बारे में ज्यादा जानने जुटे हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास  है कि यह ब्लैक होल के बारे में उनकी जानकारी को समृद्ध करेगा.

Sunday, May 20, 2018

हमें ब्लैक-होल्स के बारे में कैसे पता चला? - आइजैक असिमोव

ब्लैक होल या कृष्ण विवर - अन्तरिक्ष का गहरा अँधेरा कुआं जहाँ गिरने वाला कभी वापस नहीं आता - प्रकाश भी नहीं.

इसी अन्तरिक्ष के कौतुहल से परिचय कराती यह पुस्तक - 

विज्ञान गल्प कथाओं के सर्वप्रिय लेखकों में से एक आइजैक असिमोव (IsaacAsimov) द्वारा विज्ञान के छोटे-छोटे विषयों पर बहुत ही सुन्दर लघु पुस्कें लिखी गयी थी - 'How Did We Find Out About' के रूप में यानि कि 'हमें कैसे पता चला' श्रृंखला के रूप में.

आज उनकी लिखी ऐसी ही शानदार पुस्तकों को यहाँ शेयर कर रहा हूँ, जिन्हें अरविन्द गुप्ता और उनके जैसे अन्य सुधीजनों ने हिंदी में अनुवादित किया है.
 
 
प्रस्तुत है आज की पांचवी पुस्तक - हमें ब्लैक-होल्स के बारे में कैसे पता चला? - आइजैक असिमोव  
(How Did We Find Out About the Black Holes - Isaac Asimov)
 

Friday, July 10, 2015

नासा के स्विफ्ट उपग्रह ने कैद की ब्लैक होल की यादगार तस्वीर

नासा के स्विफ्ट उपग्रह ने हाल ही में सुदूर अन्तरिक्ष में एक अद्भुत नजारा कैद किया. V404 सिग्नी (Cygni) हमसे लगभग 8000 प्रकाशवर्ष दूर स्थित एक द्वि-आधारी (Binary) तारा प्रणाली है जिसमें उसका सूर्य के सदृश्य एक अन्य सितारे के साथ आपसी परिक्रमा पथ है. इस प्रणाली में मौजूद एक ब्लैक होल के विष्फोट (eruption) ने नासा के इस उपग्रह को संकेन्द्रीय छल्लों का यह खूबसूरत नजारा देखने में मदद की. नासा के अनुसार हर कुछेक दशकों में इस ब्लैक होल में यह विष्फोट होता है. पिछली बार 1989 में यह दर्ज किया गया था. 
Cygni ४०४ पर केन्द्रित छल्लों की तस्वीर जो एक ब्लैक होल विष्फोट का परिणाम है 
स्विफ्ट में लगे शक्तिशाली एक्स-रे टेलिस्कोप की सहायता से एंड्रू बियर्डमोर के नेतृत्व में लीसेस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक दल ने एक नज़ारे को रिकॉर्ड किया जिसमे संकेन्द्रीय छल्लों (Rings) की खूबसूरती देखते ही बनते हैं. उन्होंने इन छल्लों को व्यास लगभग हमारे चन्द्रमा का आधा अनुमानित किया है. इन चित्रों को मिलाकर उन्होंने एक चलचित्र (movie) भी बनायीं है. इस खोज के अध्ययन से यह जानने में मदद होगी की अंतर-तारकीय (inter-stellar) धुल के कण इन छल्लों में किस प्रकार और कहाँ गति करते हैं. 

बियर्डमोर कहते हैं कि स्विफ्ट के अवलोकन से हमें अब तक का सबसे शानदार अंतर-तारीकिय धूलों के बिखराव का एक्स-रे रिंग प्राप्त हुआ है. इससे हमें इन धूलों के ब्लैक होल की ओर गति और उसके परिणाम को समझने में सहायता होगी. नासा के अनुसार हमसे लगभग 4000 और 7000 प्रकाशवर्ष दूर इन धुल-कणों की सतह इन छल्लों की बहुलता का कारण हो सकते हैं. 

इन छल्लो के बनने पर प्रकाश डालते हुए वे कहते हैं कि इस विष्फोट से उत्सर्जित प्रकाश में से कुछ सीधे रास्ते से स्विफ्ट तक पहुचे होंगे वहीँ कुछ ने घूमकर लम्बा रास्ता तय किया होगा. इन दोनों के बीच का समय-अंतराल एक इको प्रभाव पैदा करता है जिसके कारण ही हमें इस चित्र में फैलता हुआ Bull’s Eye (बैल की आँख के सदृश्य) नजारा प्राप्त हुआ है.