ब्रम्हाण्ड (Universe) - इस सृष्टि में जो कुछ भी है वह सब ब्रह्मांड है। ब्रम्हांड की अवधारणा के अंतर्गत समय, स्थान , पदार्थ, ऊर्जा और इनके मध्य स्थित समस्त शामिल हैं। दुसरे शब्दों में आकाशगंगाएं, सितारे, गृह, कृष्ण-विवर, स्थान, समय, ऊर्जा एवं पदार्थ समस्त चीजें ब्रम्हांड के अंतर्गत आती हैं। अस्तित्व में मौजूद हर चीज ब्रह्मांड का भाग है।
अंतरिक्ष (Space/Outer Space) - पृथ्वी के बाहर स्थित विस्तार को सामान्य रूप से अन्तरिक्ष या बाह्य अंतरिक्ष कहा जाता है. पृथ्वी से बाहर और आकाशीय पिंडों के बीच मौजूद समस्त स्थान अंतरिक्ष ही है। यह स्थान भले ही रात्रि आकाश में रिक्त या शून्य नजर आता है परन्तु यह एक कठोर निर्वात है जिसमें कणों का कम घनत्व होता है. इस स्थान में मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम का एक प्लाज्मा, विद्युत चुम्बकीय विकिरण, चुंबकीय क्षेत्र, न्यूट्रिनो, धूल, ब्रह्मांडीय किरणें और रहस्यमय डार्क मैटर रहती हैं।
आकाशगंगा (Galaxy) - आकाशगंगा तारों , तारकीय अवशेषों , अंतरतारकीय गैस , ब्रम्हांडीय धूल और डार्क मैटर का एक तंत्र है जो गुरुत्वाकर्षण द्वारा एक साथ बंधे होते हैं । एक आकाशगंगा में औसतन लगभग 10 करोड़ तारे होते हैं। हर आकाशगंगा गतिमान है और अपने द्रव्यमान केंद्र की परिक्रमा करता है। एक सामान्य आकाशगंगा का अधिकांश द्रव्यमान डार्क मैटर के रूप में होता है। अत्यधिक और उस द्रव्यमान का केवल कुछ प्रतिशत ही तारों और नीहारिकाओं के रूप में दिखाई देता है । इन आकाशगंगाओं के केंद्र में एक अत्यधिक विशालकाय और शक्तिशाली ब्लैक होल रहता है जो आज भी एक अबूझ पहेली की तरह है। हमारी आपनी आकाशगंगा का नाम हिंदी में दुग्धधारा या आकाशगंगा ही है वहीं अंग्रेजी में इसे मिल्की वे कहते हैं.
निहारिका (Nebula) - निहारिका से तात्पर्य अंतरतारकीय माध्यम में स्थित ऐसे अंतरतारकीय बादल को कहते हैं जिसमें धूल, हाइड्रोजन गैस, हीलियम गैस और अन्य आयनीकृत (आयोनाइज़्ड) प्लाज़्मा गैसे उपस्थित हों। इन ब्रम्हांडीय अंतरतारकीय बादलों में तारे और ग्रह-मण्डल जन्म लेते हैं। निहारिका में स्थित गैसें तथा धूल परस्पर जुड़कर तारों का निर्माण करते हैं तथा शेष सामग्रियों से ग्रहों एवं ग्रह प्रणाली का निर्माण होता है।
तारा (Star) - तारा एक खगोलीय पिंड है जो नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया से ऊर्जा उत्पन्न करता है. किसी तारे में मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसें होती हैं जो गुरुत्वाकर्षण के कारण एक गैसीय पिंड के रूप में विद्यमान रहती हैं. नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया में ऊर्जा उत्पन्न होती है जो प्रकाश तथा विद्युत चुम्बकीय विकिरण तथा अन्य रूप में उत्सर्जित होती रहती है। तारे स्वयं प्रकाशित होते हैं तथा उनकी अपनी ग्रह-प्रणालियाँ हो सकती हैं.
सौरमंडल (Solar System) - हमारे तारे सूर्य तथा उसकी परिक्रमा करने वाले ग्रहों, उनके उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं तथा सूर्य के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आने वाली समस्त चीजें जिसमें ऊर्ट क्लाउड तथा काईपर बेल्ट वस्तुएं भी शामिल हैं, सौर मंडल के अंतर्गत माने जाते हैं। यह सूर्य का परिवार है जिसका केंद्र सूर्य है।
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