Sunday, May 17, 2015

सप्तर्षि तारामंडल (Ursa Major Constellation)

सप्तर्षि तारामंडल - प्रमुख गलाक्सियाँ और नेब्युला
सप्तर्षि तारामंडल (Ursa Major) पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) के आकाश में नज़र आने वाला एक तारामंडल है। जैसा पहले उल्लेख है कि आधुनिक खगोल-शास्त्र में तारा-समूह के आस-पास के सम्पूर्ण क्षेत्र को भी तारामंडल ही कहा जाता है. परन्तु यहाँ किसी भी संदेह की स्थिति से बचने के लिए यहाँ ये बताना आवश्यक है कि इस लेख में हम सात तारों के समूह के बारे में चर्चा कर रहे हैं जो नक्षत्र या तारा-पुंज (Asterism) बनाते हैं, ना कि उसके आसपास के क्षेत्र की जिसके लिए हम तारामंडल (Constellation) का प्रयोग करेंगे. भारत में इसे फाल्गुन-चैत्र माह से श्रावण-भाद्र माह तक बेहतर रूप में आसमान में

सात तारों के एक समूह के रूप में देखा जा सकता है। इसमें चार तारें एक चतुर्भुजीय आकृति का निर्माण करते हैं और शेष तीन तिरछी लक़ीर में रहते हैं। प्राचीन भारत में इन सात तारों को सात-ऋषि माना गया था जिनके नाम क्रमशः क्रतु, पुलह, पुलस्त्य, अत्रि, अंगिरस, वाशिष्ठ तथा मारीचि माने गए थे, इसलिए इसका नाम सप्तर्षि पड़ा. इसे एक पतंग का आकार भी माना जा सकता है जो कि आकाश में डोर के साथ उड़ रही हो। किसी-किसी लोक क्षेत्र में इसे ‘खटिया-चोर’ के भी नाम से जाना जाता है, क्योंकि चार चौकोर आकृति बनाने वाले तारे एक खटिया (पलंग) की तरह लगते हैं जिन्हें तीन चोर ले के भाग रहे हों. इस तारामंडल के आगे के दो तारों को जोड़ने वाली पंक्ति को यदि सीधे उत्तर दिशा में बढ़ायें तो यह ध्रुव तारे पर पहुंचती है। यह प्राचीन काल से ही विश्व कि विभिन्न सभ्याताओं में पहचाने जाने वाला प्रमुख तारामंडल था जिसकी अलग-अलग देशों में अलग-अलग रूप में कल्पना की गयी थी. संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में इसे बिग डिपर या बड़े चम्मच (Big Dipper) और कभी-कभी बड़े भालू (Big Bear), यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) में इसे प्लौघ या हल (Plough) के नाम से जाना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम उर्सा मेजर (Ursa Major) है.
 

सप्तर्षि के तारे –
सप्तर्षि नक्षत्र या तारापुंज, इस तारामंडल के सात चमकीले सितारों के समूह का सबसे ज्यादा पहचाने वाला समूह है. इस समूह के सात सितारे इस प्रकार हैं – 

भारतीय नाम
अंतर्राष्ट्रीय नाम
चमक (Magnitude)
पृथ्वी से दूरी (प्रकाश वर्षों में )
क्रतु
Dubhe
1.8
124
पुलह
Merak
2.4
79
पुलस्त्य
Phecda
2.4
84
अत्रि
Megrez
3.3
81
अंगिरस
Alioth
1.8
81
वशिष्ठ
Mizar
2.1
78
मारीचि
Alkaid
1.9
101

 
क्रतु (Dubhe) और मरीचि (Alkaid) के अलावा बाकी सारे सितारे उपयुक्त रूप से धनु राशि के एक बिंदु की ओर गतिशील हैं. ऊपर के दोनों सितारे जो ध्रुव तारे को खोजने में सहायक हैं – संकेतक सितारे (Pointing Stars) भी कहलाते हैं.

जहाँ तक रही बात सप्तर्षि तारामंडल की तो अब तक इसके 93 तारों को बायर नाम (एक तारकीय नामकरण प्रणाली जिसमे कोई सितारा ग्रीक अक्षर से पहचाना जाता है, जिसके बाद उसके पालक तारामंडल का लैटिन नाम रहता है) दिए जा चुके हैं, जिनमें से २१ तारों के इर्द-गिर्द ग़ैर-सौरीय ग्रह परिक्रमा करते हुए पाए गए हैं। 

सप्तर्षि तारामंडल में कई गैलेक्सियाँ भी पाई गई हैं। इनमें मॅसिये 81 नामक सर्पिल गैलेक्सी है, जो आकाश में सबसे रोशन गैलेक्सियों में से एक है। इस तारामंडल के क्षेत्र में मॅसिये 82 नामक गैलेक्सी भी है जिसे अपने आकार की वजह से सिगार गैलेक्सी भी कहा जाता है। यहाँ हमसे 2.5 करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर स्थित चकरी गैलेक्सी (पिनव्हील गैलेक्सी) भी स्थित है। कुल मिलकर सप्तर्षि तारामंडल में लगभग 50 गैलेक्सियाँ देखी जा चुकी हैं।

1 comment:

  1. Ursa major has many myths attached to it, the most popular being the greek myth that wife of zeus(jupitor), hera, turned zeus' other wife callisto into a bear and placed her before zeus, so that zeus may kill the bear while hunting! but zeus recognised the bear(callisto), and placed her amongst the stars in the form of bear. Hera got angry and asked the sea god,never to allow the bear to have a bath! That is why it is said that ursa major circles the north pole of sky but never sets below the horizon!!

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