Thursday, March 26, 2015

पृथ्वी का वायुमंडल (Atmosphere of Earth)

वायुमंडल किसी भी ग्रह या उपग्रह के चारों ओर विभिन्न प्रकार की गैसों का एक विशाल घेरा होता है, जिसे वायुमंडल कहते हैं. यही वायुमंडल उस पिंड के वातावरण का प्रमुख निर्धारक तत्व होता है. हमारी पृथ्वी अपने गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण वायु को अपनी ओर खींचकर रखती है तथा उसे अपने गुरुत्वीय प्रभाव से मुक्त नहीं होने देती. यही कारण है कि हमारे चारों ओर वायु विद्यमान है. वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है जिसमे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाईऑक्साइड आदि प्रमुख गैसें हैं. इन गैसों के अलावा अन्य गैसें जैसे ऑर्गन, हाइड्रोजन, हीलियम, ओजोन आदि बहुत की कम मात्रा में विद्यमान हैं. इन गैसों के अतिरिक्त वायु में धूलकण तथा जलवाष्प भी सम्मिलित हैं.
 
वायुमंडल में प्रमुख गैसों का वितरण .

गैस
प्रतिशत
नाइट्रोजन
78.09
ऑक्सीजन
20.95
आर्गन
0.93
कार्बन डाई-ऑक्साइड
0.03
नियान
0.0018
हाइड्रोजन
0.001
हीलियम
0.000524
क्रिप्टन
0.0001
जेनान
0.000008
ओजोन
0.000001


वायुमंडल धरातल से लगभग 1600 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला हुआ है.  इसे पाँच भागों में विभाजित किया जाता है –
1. क्षोभ मंडल (Troposphere)
धरातल के सबसे समीप की परत खोभ्मंडल है. इसी मंडल में हम रहते हैं और इसी मंडल में आंधी, बरसात, तूफ़ान, बिजली का चमकाना, बादलों का गर्जना आधी मौसमी परिवर्तन होते रहते हैं. इसलिए इसे परिवतन मंडल भी कहा जाता है. इसकी ऊँचाई धरातल से लगभग 16 किलोमीटर तक मानी गयी है. इस मंडल में धरातल से जैसे-जैसे ऊपर की ओर जाते हैं, वैसे-वैसे तापमान कम होता जाता है. आमतौर पर १ किलोमीटर की ऊँचाई चढ़ने पर तापमान लगभग ६.५ डिग्री सेल्सियस तक कम हो जाता है. यही कारण है की ऊँचे स्थान मैदानों की अपेक्षा ठन्डे होते हैं.

2. समताप मंडल (Stratosphere) – नाम के अनुसार इस भाग में तापमान लगभग एक समान रहता है. जहां तक इसकी ऊँचाई की बात है तो यह क्षोभ मंडल से लगभग ५० किलो मीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है परन्तु इसकी मोटाई भूमध्य रेखा पर कम और ध्रुवों पर अधिक होती है. 

3. ओजोन मंडल (Ozone Layer)– इस मंडल में ओजोन गैस की प्रचुरता रहती है जो हमें सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है. 

4. आयन मंडल (Ionosphere) – आयन मंडल में पृथ्वी की ओर से भेजी गयी रेडियो तरंग वापस लौटकर पृथ्वी पर ही आ जाती है, जिसके कारण यह टेलीविज़न और रेडियो प्रसारण को संभव बनाती है. 

5. बाह्य मंडल (Exosphere) – यह वायुमंडल की सबसे उपरी परत है. यहाँ विरल गैसें पायी जाती हैं.
वायुमंडल पृथ्वी पर जीवन हेतु अति-आवश्यक है. ऑक्सीजन जहाँ प्राण वायु है वहीँ नाइट्रोजन पेड़-पौधों को बढ़ने में सहायक होती है. इसी प्रकार जिस कार्बन डाई-ऑक्साइड को हम श्वसन क्रिया में निष्काषित करते हैं, उसके सहारे पेड़-पौधे अपना भोजन बनाते हैं. यह पृथ्वी के तापमान को संतुलित रखता है. इसी के माध्यम से ध्वनि एक स्थान से दुसरे स्थान तक पहुँच पाती है. यदि हवा न होती तो हमें एक-दुसरे की आवाज़ सुनाई नहीं देती.

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