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Friday, June 8, 2018

भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार खोजा एक नया बाह्य ग्रह


केवल प्रतीकात्मक / चित्रात्मक रूपांकन

 भारतीय ज्ञान और सभ्यता सदा से समृद्ध रही है. हमारे पूर्वजों ने अन्तरिक्ष के अनेक रहस्यों को सदियों पहले ही जान लिया था और सौर-परिवार के सम्बन्ध में उनकी अनेक गणनाएं आज भी प्रासंगिक हैं. भले ही हमारे पूर्वज सौर परिवार में शनि तक के समस्त ग्रहों को जानते थे परन्तु आधुनिक अन्तरिक्ष अन्वेषणों में नित नए खोजे जाने वाले सुदूर ग्रहों की सूची में भारतीय खोज का नाम नहीं रहा था. 

परन्तु आज के दिन (8 जून 2018), आधुनिक अन्तरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक नया आयाम स्थापित हुआ है जब अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च प्रयोगशाला (Physical Research Laboratory (PRL)) के वैज्ञानिकों के एक दल ने हमारे शनि ग्रह से छोटे एक बाह्य-सौरमंडलीय ग्रह को खोज निकाला है जो हमारी पृथ्वी से लगभग २७ गुणा अधिक द्रव्यमान धारण किये हुए है. इसके इस अधिक द्रव्यमान के लिए वैज्ञानिकों ने इस ग्रह में भारी तत्वों जैसे  बर्फ, सिलिकेट और लोहे की प्रचुर उपस्थिति का अनुमान व्यक्त किया है. आकार में धरती की त्रिज्या से  6 गुना  ज्यादा विस्तृत है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह हमारे सूर्य के सदृश्य तारे की परिक्रमा कर रहा है जो हमसे 600 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है. वैज्ञानिकों ने इस सितारे का  नाम  EPIC 211945201 या K2-236 रखा है और जैसा की प्रचलित नामकरण प्रणाली है इस ग्रह का नाम सितारे के नाम के साथ प्रत्यय रूप में संकेतक लगाकर EPIC 211945201b या K2-236b रखा गया है. वैसे भी इतने सारे अम खोजने संभव भी नहीं हैं. है न! 

वर्तमान गणनाओं के मुताबिक इसकी धरातलीय तापमान को 600 डिग्री सेल्सियस के करीब अनुमानित किया गया है, जो कि अपने सितारे के काफी नजदीक होने के कारण इसका गर्म है. यह अपने सितारे से लगभग 2 करोड़ किलोमीटर दूर है. इतना तेज तापमान इसे जीवन के प्रतिकूल बना देता है इसलिए हमारी जीवन की धारणाओं के अनुसार यह ग्रह पुरतः निर्जीव है. चूँकि इस ग्रह का आकार नेपच्यून और शनि जैसे बड़े ग्रहों के बीच का है परन्तु दूरी हमारी धरती से उसके सितारे की दूरी का केवल 7वाँ हिस्सा है, इसलिए यह खोज काफी अर्थपूर्ण है और वैज्ञानिक इसका अध्ययन करने को जिज्ञासु हैं. 

भारतीय वैज्ञानिकों ने इस ग्रह की खोज माउंट आबू में स्थित गुरुशिखर वेधशाला के शक्तिशाली दूरदर्शी के माध्यम से की है जो स्वदेश में निर्मित परास (PARAS) के साथ एकीकृत है. वैसे इस ग्रह का अनुमान नासा के प्रकाशमिति या प्रकाशमापन के द्वारा पहले भी लगाया गया था जब यह अपने सितारे का प्रेक्षण करते प्रेक्षक के मध्य विचलन पैदा करते पाया गया था. परन्तु इसकी विधिवत खोज की घोषणा वैज्ञानिकों ने आज ही भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान केंद्र – इसरो की वेबसाइट पर की गयी है. यह खोज वैज्ञानिकों के 1.5 वर्ष के सतत प्रयास का परिणाम है. वैसे अभी तक केवल कुछ ही बाह्य-सौरमंडलीय ग्रह खोजे गए हैं जिनका द्रव्यमान (पृथ्वी के द्रव्यमान का 10 से 70 गुना) और त्रिज्या (पृथ्वी की त्रिज्या से  4 से 8 गुनी) इस सीमा में हो. वैसे आज तक केवल 23 ऐसी प्रणालियाँ ही मिली हैं इस सीमा में जिनकी गणना की शुद्धता 50% या उससे ज्यादा है. यह तकनीकी पहलू इस खोज को और भी महत्वपूर्ण बना देता है.

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